Sunday, August 16, 2015

रानी का स्वप्न

रानी का स्वप्न
 गंधार देश की रानी को अपनी खूबसूरती का बड़ा घमंड था। वह अपने आप को दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत समझती थी। उसकी इस आदत से अन्य रानिया व स्वयं राजा बड़ा दुखी था। लेकिन, चूंकि वह सबसे ज्यादा सुंदर थी इस वजह से उसे कोई कुछ नहीं कहता। एक दिन रानी अपने महल में सो रही थी कि तभी उसने एक स्वप्न देखा। वह अपनी सहेलियों के साथ घुमने जा रही थी।
 रास्ते में उसे उसे एक सुंदर बगीचा दिखाई दिया। रानी ने सोचा की मैं इतनी सुंदर हूं तो क्या मेरे सौंदर्य के आगे यह बागीचा ज्यादा सुंदर है। इसी सोच के चलते वह उस बागीचे में घूमने चली गई। जैसे ही वह उस बागीचे में घुसी उसके सारे सिपाही व दासियां बेहोश हो गईं। इतना देखते ही रानी बहुत डर गई। रानी के समझ में नहीं आया की वह क्या करे। उसने जैसे तैसे बागीचे के और अंदर प्रवेश किया। अंदर का माहौल देख कर वह चौंक गई। वहां एक महर्षि तीन कौआें के साथ बैठे थे। वह उन सभी कौआें से एक एक सवाल कर रहे थे। उन्होंने उन कौआें से कहा कि यदि तुम मेरे सवालों का जवाब दे दो तो मैं तुम्हें दुनिया का सबसे सुंदर प्राणी मान लूंगा। यह देख कर रानी को बहुत आश्चर्य हुआ। वह उनके पास गई। उसने महर्षि से पूछा महर्षि दुनिया की सबसे सुंदर महिला तो मैं हूं, फिर आप एेसे अनमोल प्रश्न इन कौआें से क्यों पूछ रहे हैं। महर्षि ने कहा कि यदि तुमको लगता है कि यह तीनों तुम्हारे सामने कुरुप हैं तो तुम ही इन सवालों के उत्तर दे दो। रानी झट से तैयार हो गई। इस पर महर्षि ने पूछा यदि तुम्हारे पास एक रुपये हों और तुम्हें पूरे महल को रौशन करना हो तो तुम क्या करोगी। रानी ने जवाब दिया महर्षि भला एक रुपये से कोई कमरे को कैसे भर सकता है। महर्षि के बार—बार पूछने पर भी रानी को कोई जवाब नहीं सूझा।
इस पर महर्षि ने एक कौए से कहा कि तुम बताआे एक रुपये में पूरे कमरे को भरने का क्या मिलेगा। कौए ने झट से जवाब दिया प्रकाश। एक रुपये की एक मोमबत्ती से हम पूरे कमरे में प्रकाश फैला सकते हैं। रानी को बड़ा गुस्सा आया। लेकिन वह चुप रही। महर्षि ने दूसरा सवाल किया एेसी कौन सी चीज है जो हमेशा हमारे साथ साथ चलती है मगर हमें दिखती नहीं। रानी को अब भी कोई सही जवाब नहीं सूझा। इस पर महर्षि ने दूसरे कौए की तरफ ईशारा किया। कौए ने उत्तर दिया महाराज मौत। वह हमेशा मनुष्य के साथ साथ चलती है मगर वह तभी मिलती है जब मनुष्य अचेत हो जाता है। उससे पहले हम उसे देख नहीं सकते। अब बारी आई तीसरे और अंतिम प्रश्न की। महर्षि ने रानी को तीन पत्थर दिए और कहा कि इनसे एक चांद बना दो। रानी काफी देर तक उन पत्थरों को जोड़ती रही मगर सफल न हो सकी। इस पर महर्षि ने तीसरे कौए को आदेश दिया। उसने रानी के हाथ से एक पत्थर लिया और उससे जमीन पर चांद की आकृति बना दी। 
अब रानी को समझ में आ गया कि शरीर का सौंदर्य सिर्फ नाम मात्र का है असली सुंदरता तो मनुष्य के दिमाग की गति है। बुद्धीमान व्यक्ति अपने विवेक से दुनिया में सबसे सुंदर बन जाता है। 

Friday, August 14, 2015

बाल कथा - बेईमान को मिली सजा

बाल कथा

बेईमान को मिली सजा


एक गांव में एक सोनार रहता था। बड़ा ही शरीफ, बड़ा ही नेक। सबका भला करने वाला। उसने अपने ईमान को ही अपनी दौलत बना रखी थी। उसी गांव में एक ध्रुत आदमी रहता था। उसकी इच्छा थी की कभी भी इस सोनार को बेवकूफ बना कर लूटा जाए। अपनी इसी चाल के चलते वह एक दिन सोनार के पास गया। सोनार से बोला की उसकी बीबी बहुत बीमार है। उसे कोई देखने वाला नहीं है। डाक्टर से ईलाज के लिए उसे कुछ पैसे चाहिए। इतना कहते ही ध्रुत व्यक्ति ने जेब से नकली सोने की चेन निकाली और सोनार को दे दी। 

सोनार सीधा था मगर था तो सोनार ही। चेन देखते ही समझ गया कि यह तो नकली है। मगर, उसने सोचा की यह व्यक्ति इतनी मिन्नत कर रहा है तो हो सकता है कि इसकी पत्नी सच में काफी बीमार हो। तो क्यों ना इसे इस नकली सोने के बदले कुछ पैसा दे दें। सोनार ने अपने थैले से कुछ पैसे निकाली और उस व्यक्ति को दे दिए। पैसा लेते ही ध्रुत व्यक्ति तेजी से अपने घर की आेर चला। उसे लगा कि चलो आज तो सोनार को उल्लु बना लिया है। अब यह पैसे मेरे। जैसे ही वह घर पहुंचा तो देखता है कि उसकी पत्नी सच में बीमार हो गई। उसे उसके ईलाज के लिए अस्पताल लेकर जाना है। जितने पैसे उसके पास हैं वह उससे पत्नी का ईलाज नहीं करा सकता। एेसे में वह पैसों के इंतजाम के लिए आस पड़ोस के लोगों से पैसे मांगने शुरू कर दिए। मगर कोई भी व्यक्ति उस कपटी को पैसे देने को राजी नहीं हुआ। थकाहारा वह वापस अपने घर पहुंचा तो देखता है कि उसकी पत्नी घर पर नहीं है। बच्चे भी नहीं हैं। बड़ा परेशान वह पड़ोसियों से पूछता है तो पता चलता है कि उसकी पत्नी व बच्चे तो किसी सेठ के साथ अस्पताल गए हैं। वह भागा—भागा अस्पताल पहुंचता है तो देखता है कि उसकी पत्नी अस्पताल में भर्ती है और उसका ईलाज वही सोनार करा रहा है जिसे उसने ठगे थे। वह तुरंत सोनार के पैरों पर गिर पड़ता है। उससे अपने किए की माफी मांगता है। सोनार उसे बड़े प्यार से उठाता है और कहता है भाई कभी—कभी हमारे किए गए कर्मों की सजा बड़ी जल्दी भगवान हमें दे देता है। 

यदि कमाना चाहते हो तो अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर कमाआे।

Wednesday, May 13, 2015

Beiman Ko Mili Saza

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